मानव श्वसन तंत्र का चित्र कैसे बनाएँ और नामांकित करें (स्टेप बाय स्टेप)
मानव श्वसन तंत्र का चित्र कक्षा 10 जीव विज्ञान (जैव प्रक्रम, श्वसन) में पूछा जाता है। इसमें नाक से फुफ्फुस तक हवा का पूरा रास्ता दिखता है। नीचे के स्टेप्स पहले सिर और छाती की रूपरेखा बनाते हैं, फिर हर वायु मार्ग को क्रम से।

मानव श्वसन तंत्र का पूरा नामांकित चित्र, सभी 7 भागों के नाम हिंदी में। नीचे के स्टेप्स इसे एक-एक भाग करके बनाते हैं।
मानव श्वसन तंत्र क्या करता है
हवा नासाद्वार से नासा गुहा में आती है, ग्रसनी और कंठ से होकर श्वास नली में नीचे जाती है। श्वास नली दो श्वसनियों में बँटती है, जो फुफ्फुस के अंदर पतली श्वसनिकाओं में बँटती जाती हैं। ये छोटी-छोटी वायु थैलियों, वायुकोष्ठिकाओं, में खत्म होती हैं, जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है। फुफ्फुस के नीचे गुंबद जैसी पेशी, डायाफ्राम, साँस लेने में मदद करती है।
11 स्टेप्स में बनाइए
पेंसिल नुकीली रखें और पहले हल्के हाथ से बनाइए। हर चित्र में लाल वह भाग है जो इस स्टेप में बनाना है, और स्लेटी वह जो पहले बन चुका है।

सिर और गर्दन
बगल से देखे सिर की रूपरेखा से शुरू कीजिए: बाईं ओर सिर का पिछला भाग और गर्दन, दाईं ओर नाक, होंठ और ठुड्डी वाला चेहरा।

कंधे और छाती
गर्दन से दोनों ओर नीचे ढलते कंधे बनाइए, और छाती की दीवार की दो रेखाएँ नीचे की ओर।

नासा गुहा
सिर के अंदर नासा गुहा बनाइए: एक मुड़ा हुआ रास्ता जो नाक के पीछे से शुरू होकर पीछे जाता है और गले में नीचे मुड़ जाता है।
बनने वाले भाग: नासा गुहा, ग्रसनी

कंठ
जहाँ गला श्वास नली से मिलता है, वहाँ एक छोटा गोल उभार बनाइए: यह कंठ (स्वर यंत्र) है।
बनने वाले भाग: कंठ (लैरिंक्स)

श्वास नली
बीच में सीधी नीचे जाती श्वास नली बनाइए, जिस पर एक के नीचे एक छल्ले हों।
बनने वाले भाग: श्वास नली

श्वसनी
श्वास नली के नीचे इसे दो छोटी नलियों में बाँटिए, एक-एक हर फुफ्फुस की ओर: ये श्वसनी हैं।
बनने वाले भाग: श्वसनी

बाईं ओर का फुफ्फुस
बाईं ओर का फुफ्फुस बनाइए: एक लंबा गोल आकार, ऊपर संकरा और नीचे चौड़ा, जिसकी सपाट ओर श्वास नली की तरफ हो।
बनने वाले भाग: फुफ्फुस

दाईं ओर का फुफ्फुस
दाईं ओर का फुफ्फुस भी इसी तरह श्वास नली के पास बनाइए।

श्वसनिकाएँ: बायाँ फुफ्फुस
बाएँ फुफ्फुस के अंदर श्वसनी को बार-बार पतली नलियों में बँटते हुए बनाइए, उल्टे पेड़ की तरह।
बनने वाले भाग: श्वसनिका

श्वसनिकाएँ: दायाँ फुफ्फुस
दाएँ फुफ्फुस के अंदर भी ऐसा ही कीजिए।

डायाफ्राम
दोनों फुफ्फुसों के नीचे डायाफ्राम बनाइए: गुंबद जैसी पेशी की मुड़ी हुई परत, जिस पर महीन रेखाएँ हों।
बनने वाले भाग: डायाफ्राम
नामांकित करने वाले भाग (7) और उनका कार्य
- नासा गुहा (Nasal cavity) हवा नासाद्वार से अंदर आती है। यहाँ के महीन बाल और श्लेष्मा हवा को छानते हैं, और हवा गर्म व नम हो जाती है।
- कंठ (लैरिंक्स) (Larynx) स्वर यंत्र (वॉयस बॉक्स), जो श्वास नली के ऊपरी सिरे पर होता है।
- श्वास नली (Trachea) वायु नली। उपास्थि के छल्ले इसे पिचकने से रोकते हैं, ताकि हवा हमेशा आ-जा सके।
- श्वसनी (Bronchi) श्वास नली की दो शाखाएँ, जिनमें से एक-एक हर फुफ्फुस में जाती है।
- फुफ्फुस (Lungs) दो स्पंजी अंग, जहाँ लाखों वायुकोष्ठिकाओं की दीवारों से ऑक्सीजन रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर आती है।
- डायाफ्राम (Diaphragm) फुफ्फुस के नीचे गुंबद जैसी पेशी। जब यह चपटी होती है, छाती बड़ी होती है और हवा अंदर खिंचती है।
- श्वसनिका (Bronchioles) फुफ्फुस के अंदर श्वसनी की और पतली होती शाखाएँ। ये छोटी वायु थैलियों, वायुकोष्ठिकाओं, में खत्म होती हैं।
हर नाम चित्र के किनारे लिखिए और उसे उसके भाग से एक सीधी रेखा द्वारा जोड़िए। रेखाएँ एक-दूसरे को काटें नहीं।
मानव श्वसन तंत्र का बिना नामांकन वाला चित्र (अभ्यास के लिए)
वही चित्र, जिसमें नामांकन रेखाएँ हैं पर नाम नहीं। हर रेखा पर भाग का नाम लिखिए, फिर ऊपर के नामांकित चित्र से मिलाइए।

परीक्षा के लिए सुझाव
- श्वास नली पर छल्ले ज़रूर बनाइए। ये उपास्थि के छल्ले हैं जो इसे पिचकने से रोकते हैं।
- श्वसनिकाओं को बार-बार बँटने दीजिए, उल्टे पेड़ की तरह।
- अंत में दोनों फुफ्फुसों के नीचे गुंबद जैसा डायाफ्राम बनाइए।
आम गलतियाँ
- श्वास नली को बिना छल्लों की सादी नली बना देना।
- श्वसनी (दो मुख्य शाखाएँ) और श्वसनिकाओं (फुफ्फुस के अंदर की पतली शाखाएँ) में गड़बड़ करना।
- डायाफ्राम भूल जाना।
मानव श्वसन तंत्र चित्र पर परीक्षा प्रश्न
प्रश्नमानव श्वसन तंत्र का चित्र बनाइए और इन भागों को नामांकित कीजिए: श्वास नली, श्वसनी, श्वसनिका, फुफ्फुस और डायाफ्राम।
ऊपर नासा गुहा और कंठ बनाइए, फिर बीच में नीचे जाती श्वास नली। यह दो श्वसनियों में बँटती है, एक-एक हर फुफ्फुस में, और ये आगे श्वसनिकाओं में बँटती हैं। दोनों फुफ्फुसों के नीचे गुंबद जैसा डायाफ्राम बनाइए।
प्रश्नवायुकोष्ठिकाएँ गैसों के आदान-प्रदान के लिए कैसे उपयुक्त हैं?
ये लाखों की संख्या में होती हैं, इसलिए इनकी कुल सतह बहुत बड़ी होती है (फैलाने पर लगभग 80 वर्ग मीटर)। इनकी दीवारें बहुत पतली होती हैं और रुधिर केशिकाओं से ढकी रहती हैं, इसलिए ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जल्दी आर-पार जाती हैं।
छात्रों के सवाल
श्वास नली में छल्ले क्यों होते हैं?
ये छल्ले उपास्थि के बने होते हैं। ये वायु नली को खुला रखते हैं, ताकि हवा कम होने पर भी वह पिचके नहीं।
गैसों का आदान-प्रदान कहाँ होता है?
वायुकोष्ठिकाओं में, जो श्वसनिकाओं के सिरों पर छोटी-छोटी वायु थैलियाँ हैं।
डायाफ्राम का क्या काम है?
साँस अंदर लेते समय यह चपटा होकर नीचे जाता है, जिससे छाती की गुहा बड़ी होती है और हवा फुफ्फुस में खिंच आती है।
फ़ोन पर अभ्यास करें
ये स्टेप्स मुफ़्त Android ऐप How To Draw Diagram Science से हैं। ऐप में आप हर चित्र देख सकते हैं, स्टेप बाय स्टेप बनाना सीख सकते हैं, भागों पर क्विज़ दे सकते हैं और खुद नामांकित कर सकते हैं।